हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज आज के समय में तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख बीमारियों में गिनी जाती हैं। डॉक्टरों के अनुसार ये दोनों स्थितियां अक्सर एक साथ शरीर पर असर डालती हैं, लेकिन शुरुआती दौर में इनके लक्षण इतने हल्के होते हैं कि लोग इन्हें सामान्य थकान या तनाव मानकर अनदेखा कर देते हैं।
समस्या यह है कि समय पर ध्यान न देने पर यही बीमारियां धीरे-धीरे दिल, किडनी, आंखों, दिमाग और रक्त वाहिकाओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं।
भारत में डायबिटीज के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR-INDIAB) की स्टडी के अनुसार, इसका मुख्य कारण मोटापा, शारीरिक गतिविधियों की कमी और अनियमित जीवनशैली है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि केवल शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी बड़ी संख्या में लोग इन बीमारियों से प्रभावित हैं और कई मामलों में उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं होती।
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज आपस में जुड़ी हुई मेटाबॉलिक समस्याएं हैं, जो एक-दूसरे की स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। कोरोना रेमेडीज लिमिटेड के एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ मेडिकल अफेयर्स डॉ. अमित सोनी का कहना है कि लगातार सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, असामान्य थकान, पैरों में सूजन और बार-बार पेशाब आना जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों के असंतुलन के संकेत हो सकते हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, बार-बार सिर दर्द होना, खासकर सुबह के समय या हल्की शारीरिक मेहनत के बाद, हाई ब्लड प्रेशर का संकेत हो सकता है। अगर इसके साथ डायबिटीज भी मौजूद हो, तो यह स्थिति और गंभीर हो जाती है क्योंकि रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
डायबिटीज के कारण आर्टरीज सख्त और कम लचीली हो जाती हैं, जिससे दिल को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
कई मामलों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर बिना स्पष्ट लक्षणों के एक ही व्यक्ति में मौजूद रहते हैं। जब ये दोनों साथ होते हैं, तो हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, किडनी की समस्या और आंखों की रोशनी प्रभावित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
इसके लक्षणों की बात करें तो पैरों में सूजन, लगातार थकान महसूस होना, रात के समय बार-बार पेशाब आना और अत्यधिक प्यास लगना शरीर में किसी गंभीर समस्या के संकेत हो सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार जब किडनी ब्लड से अतिरिक्त शुगर और फ्लूइड को सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पाती, तब ऐसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
आजकल खराब नींद, लंबे समय तक बैठकर काम करना, अधिक नमक और पैकेज्ड फूड का सेवन, धूम्रपान, शराब का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी युवाओं में इन बीमारियों के खतरे को तेजी से बढ़ा रही है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 30 साल की उम्र के बाद नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच कराना बेहद जरूरी है। साथ ही रोजाना वॉक करना, संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और वजन को नियंत्रित रखना जैसी आदतें भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचाव में मदद कर सकती हैं।