अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि के कथित गबन के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की मांग उठी है। अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर मामले की न्यायिक निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय बताया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का संचालन उस ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है, जिसका गठन सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2020 के ऐतिहासिक फैसले के बाद हुआ था। 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा देश के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर रही थी, जिसके बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्र में अर्पित की जाने वाली राशि को केवल आर्थिक योगदान नहीं, बल्कि उनकी गहरी श्रद्धा, विश्वास और समर्पण का प्रतीक बताया गया है।
अनूप अवस्थी का कहना है कि मंदिर की दान राशि में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। कुछ पूर्व कर्मचारियों और संदिग्ध व्यक्तियों के पास आय से अधिक संपत्ति होने की बातें भी चर्चा में हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि मंदिर की दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सीबीआई, से कराई जाए ताकि जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे। साथ ही उन्होंने मांग की है कि पूरी जांच प्रक्रिया न्यायालय की निगरानी में संचालित की जाए।
पत्र में यह भी कहा गया है कि मंदिर में प्राप्त होने वाले दान, उसके प्रबंधन और खर्च से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच की जानी चाहिए। इसके अलावा, भविष्य में दान के रूप में मिलने वाली धनराशि और संपत्तियों की सुरक्षा तथा पारदर्शी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए अदालत की देखरेख में एक प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने की भी मांग की गई है।