सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक कर भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से अर्पित किया गया साधारण जल भी भगवान शिव को प्रसन्न कर सकता है। हालांकि, जल चढ़ाते समय कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना गया है। आइए जानते हैं कौन-सी गलतियों से बचना चाहिए।
1. सही दिशा में मुख करके करें जलाभिषेक
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय दिशा का विशेष ध्यान रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल अर्पित नहीं करना चाहिए। उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल चढ़ाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
2. एक समान धारा में चढ़ाएं जल
जलाभिषेक करते समय जल की धारा लगातार और एक समान होनी चाहिए। बीच-बीच में रुक-रुककर या टूटती हुई धारा से जल चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए धीरे-धीरे और लगातार जल अर्पित करें।
3. शंख से न चढ़ाएं जल
भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए शंख का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना उचित नहीं माना जाता। जलाभिषेक के लिए लोटे या अन्य पात्र का उपयोग करना बेहतर माना जाता है।
4. परिक्रमा करते समय रखें इस बात का ध्यान
जलाभिषेक के बाद शिवलिंग की परिक्रमा करते समय पूरी गोल परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। चंद्राकार परिक्रमा करने की परंपरा है। साथ ही जिस स्थान से जल बाहर निकल रहा हो, उस जलधारा को लांघने से भी बचना चाहिए।
जलाभिषेक के दौरान करें मंत्रों का जाप
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय ‘ॐ नमः शिवाय’ या ‘ॐ’का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
सावन में इन चीजों का भी करें अर्पण
सावन के महीने में जल के साथ भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा, आक के फूल और सफेद चंदन अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे भोलेनाथ प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.