राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन का नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला और क्या हो सकती है कार्रवाई

 

संसद के मानसून सत्र के दौरान एंटी पेपर लीक बिल पारित होने के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक नए विवाद में घिर गए हैं। सदन में कथित तौर पर आपत्तिजनक और गैर-संसदीय शब्दों के इस्तेमाल को लेकर उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की मांग उठी है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यह पूरा मामला क्या है और आगे क्या कार्रवाई हो सकती है।

क्या है पूरा विवाद?

जानकारी के मुताबिक, भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने 30 जुलाई 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपा। शिकायत में 29 जुलाई को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी द्वारा कथित तौर पर गैर-संसदीय और आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है।

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने नागरिकों के एक वर्ग के लिए ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। वहीं, भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

कार्यवाही से हटाए गए विवादित शब्द

लोकसभा की कार्यवाही के आधिकारिक रिकॉर्ड से राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए इन शब्दों को हटा दिया गया है। हालांकि, विवाद यहीं नहीं थमा। शिकायत में कहा गया है कि चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कई बार ‘इडियट’ शब्द का प्रयोग किया।

अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की आपत्ति और पीठासीन अधिकारी की चेतावनी के बावजूद विवादित शब्दों का इस्तेमाल जारी रहा। उन्होंने पूरे मामले की जांच विशेषाधिकार समिति से कराने की मांग की है।

राहुल गांधी के खिलाफ क्या हो सकती है कार्रवाई?

संसदीय नियमों के तहत विशेषाधिकार हनन के नोटिस पर शुरुआती फैसला लेने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है। यदि अध्यक्ष को मामला विचारणीय लगता है, तो इसे जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है।

समिति की रिपोर्ट के आधार पर सदन आवश्यक कार्रवाई कर सकता है। यदि किसी सदस्य को दोषी पाया जाता है, तो उसे चेतावनी दी जा सकती है, सदन से माफी मांगने के लिए कहा जा सकता है या गंभीर स्थिति में प्रस्ताव पारित कर शेष सत्र के लिए निलंबित भी किया जा सकता है।

 

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