पटना में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस का एक्शन, आयकर चौराहे पर वाटर कैनन का इस्तेमाल

 

बिहार की राजधानी पटना में मंगलवार को छात्र और युवा संगठनों का प्रदर्शन उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आयकर चौराहे पर उन्हें रोक दिया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

प्रदर्शन में NSUI, AISF और DYFI से जुड़े सैकड़ों छात्र शामिल हुए। सभी पहले गांधी मैदान में एकत्र हुए और फिर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए मार्च निकाला। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री आवास से करीब दो किलोमीटर पहले ही रोक दिया।

प्रदर्शन को मिला नेताओं का समर्थन

प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम भी मौके पर पहुंचे और छात्रों का समर्थन किया। बाद में पुलिस राजेश राम समेत कुछ नेताओं को अपने वाहन में बैठाकर वहां से ले गई।

पुलिस ने क्या कहा?

अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अमरेंद्र कुमार झा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को निषिद्ध क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी। इसी वजह से वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है। केवल छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल को उनकी मांगें संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने में मदद की गई।

क्या हैं छात्रों की मांगें?

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि पिछले महीने हुए छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्रों की अब तक सत्यापित सूची जारी नहीं की गई है। उनका आरोप है कि सरकार ने सभी मामलों को वापस लेने और छात्रों की रिहाई का वादा किया था, लेकिन कई छात्र अब भी अपने घर नहीं लौट पाए हैं।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह भी मांग की कि आंदोलन के दौरान कथित तौर पर एके-47 से फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मी और संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

क्या है पूरा मामला?

पिछले महीने NEET परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर बिहार में छात्र आंदोलन हुआ था। उस दौरान तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में बिहार पुलिस ने करीब **600 लोगों को हिरासत में लिया था**। इनमें से नाबालिगों को बाद में छोड़ दिया गया, जबकि अन्य को जेल भेजा गया।

बाद में छात्र संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक से मुलाकात की थी, जिसके बाद राज्य सरकार ने मामलों को वापस लेने और गिरफ्तार छात्रों को रिहा करने की घोषणा की थी। छात्रों का आरोप है कि सरकार का यह वादा अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, इसलिए वे दोबारा सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं।

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