पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और लगातार गहराते संकट के बीच वैश्विक स्तर पर अस्थिरता का माहौल बना हुआ है, जिसका असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार आक्रामक बयानबाज़ी और धमकियों ने वैश्विक व्यापार और बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
ताजा घटनाक्रम में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष तेज होने के बाद ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का फैसला लिया गया है। इस कदम से भारत के प्रमुख व्यापारिक और औद्योगिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने गंभीर चिंता जताई है।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो यह 1970 के बाद का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे पेट्रोल और डीजल सहित कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
होर्मुज को दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग माना जाता है। यदि यह बंद होता है, तो भारत, रूस और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देशों में कच्चे तेल की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
इसके परिणामस्वरूप पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेजी आने की संभावना है, जिसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ेगा। इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
CTI महासचिव रमेश आहूजा और वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक गर्ग के अनुसार, भारत में मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान रिटेल महंगाई दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इस अवधि में पान-तंबाकू की कीमतों में 4.23 प्रतिशत, खाद्य एवं पेय पदार्थों में 3.71 प्रतिशत, कपड़े और फुटवियर में 2.45 प्रतिशत, हाउसिंग, पानी, बिजली और गैस में 1.97 प्रतिशत तथा रेस्टोरेंट सेवाओं में 2.88 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली।
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत में महंगाई दर 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 5 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने का भारत पर संभावित असर
होर्मुज को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग माना जाता है। इसके बंद होने की स्थिति में भारत पर चार प्रमुख क्षेत्रों में गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
भारत की लगभग 60 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति और करीब 40 प्रतिशत LNG इसी मार्ग से होकर आती है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत से आयात प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। अनुमान के मुताबिक, तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल लगभग 1.5 अरब डॉलर सालाना बढ़ सकता है।