चार धामों में पहली बार आने वाले श्रद्धालुओं का प्रतिशत सबसे अधिक पाया गया है। यह जानकारी भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा धामों की वहन क्षमता (Carrying Capacity) पर किए गए वर्ष 2025 के अध्ययन में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार केदारनाथ में लगभग 79 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पहली बार दर्शन के लिए आए हैं, जबकि गंगोत्री में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत तक पहुंचा। यमुनोत्री में करीब 70 प्रतिशत और हेमकुंड साहिब में सबसे अधिक 89 प्रतिशत श्रद्धालु ऐसे पाए गए जो पहली बार इन धामों में पहुंचे थे।
अध्ययन में धामों तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किए गए परिवहन साधनों का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक श्रद्धालुओं ने सार्वजनिक परिवहन, निजी टैक्सी या बस, दोपहिया वाहन, निजी कार और हेलीकॉप्टर जैसे विभिन्न विकल्पों का सहारा लिया।
केदारनाथ यात्रा के दौरान सबसे अधिक 41 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने निजी टैक्सी या बस का उपयोग किया।
केदारनाथ के बाद सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 34 प्रतिशत रही। वहीं 15 प्रतिशत यात्री निजी कारों से पहुंचे, जबकि करीब 6 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने दोपहिया वाहनों का सहारा लिया।
गंगोत्री में सबसे अधिक 61 प्रतिशत श्रद्धालु निजी टैक्सी या बस के माध्यम से पहुंचे। इसके अलावा 19 प्रतिशत लोगों ने निजी कारों का उपयोग किया, जबकि 9 प्रतिशत श्रद्धालु दोपहिया वाहनों से यात्रा करते हुए धाम तक पहुंचे। दूसरी ओर, हेमकुंड साहिब जाने वाले अधिकांश यात्रियों ने सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी।
हेमकुंड साहिब में अधिकांश श्रद्धालुओं ने सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल किया, जबकि इसके बाद निजी टैक्सी और निजी कारों का स्थान रहा। यहां करीब 12 प्रतिशत यात्री दोपहिया वाहनों से भी पहुंचे।
वहीं, यमुनोत्री में सार्वजनिक परिवहन और निजी टैक्सी का उपयोग करने वाले श्रद्धालुओं का अनुपात लगभग समान पाया गया। अध्ययन में हेलिकॉप्टर सेवाओं के उपयोग का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब में लगभग 7 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने हेलिकॉप्टर का सहारा लिया, जबकि गंगोत्री और यमुनोत्री में यह आंकड़ा करीब 3 प्रतिशत दर्ज किया गया।