लोकसभा से पारित होने के बाद Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया गया। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। चर्चा के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विधेयक छात्रों के बढ़ते गुस्से और असंतोष को शांत करने की कोशिश भर है।
खड़गे ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं सामने आईं, जिससे लाखों मेहनती और ईमानदार छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सरकार को केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
विपक्ष के नेता ने दावा किया कि इस संशोधन विधेयक में ऐसा कोई नया प्रावधान नहीं है, जिससे पेपर लीक की समस्या पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सके। उनके अनुसार, पहले से लागू कानून में भी कठोर सजा, भारी जुर्माने, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि केवल दंड का दायरा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसकी जड़ तक पहुंचकर परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करनी होगी।
खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सुझावों पर भी गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों के हितों की रक्षा करना चाहती है, तो उसे सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों के साथ मिलकर ऐसा कानून बनाना चाहिए, जो भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं को प्रभावी रूप से रोक सके और छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा बहाल कर सके।