नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया विवाद के दौरान पुलिस और पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले छात्रों का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत पहुंच गया है। एयरफोर्स के एक रिटायर्ड अफसर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की है कि सोशल मीडिया और प्रदर्शनों के दौरान गाली-गलौज करने वाले युवाओं से सज़ा के तौर पर ‘सामुदायिक सेवा’ (Community Service) कराई जाए। शीर्ष अदालत इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई है और मामले की सुनवाई बुधवार को तय की गई है।
यह पूरा विवाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में हुए छात्रों के संसद मार्च से शुरू हुआ था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस लाठीचार्ज, आंसू गैस और छात्रों की ओर से हुए पथराव में कई लोग घायल हुए थे। इसके बाद, आक्रोशित युवाओं ने सोशल मीडिया पर पुलिस व सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। इसी दौरान एक 15 वर्षीया छात्रा का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ बेहद अभद्र टिप्पणी की थी।
चौतरफा ट्रोलिंग और एफआईआर दर्ज होने के बाद छात्रा ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा था कि उसने उकसावे में आकर यह गलती की। मामले पर संज्ञान लेते हुए पीएम मोदी ने खुद देश की बेटियों के भटकने पर चिंता जताई थी और युवाओं को माफ करने का संदेश दिया था, जबकि बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने भी बेटियों के आसानी से बहकावे में आने पर सवाल उठाए थे।
हालाँकि, याचिकाकर्ता एयरफोर्स अफसर का तर्क है कि माफी से आगे बढ़कर आयोजकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और ऐसे युवाओं को सही रास्ते पर लाने के लिए सामाजिक कार्य में लगाना ज़रूरी है। अब सभी की निगाहें बुधवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस संवेदनशील विषय पर कोई अहम टिप्पणी कर सकती है।