संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो रहा है, जहाँ मोदी सरकार ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े विधेयकों समेत कई अहम बिल पेश करने की तैयारी में है। वहीं, विपक्ष भी कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। हालांकि, इस वक्त पूरा देश दिल्ली के जंतर-मंतर की हलचल पर नजर टिकाए हुए है, जहाँ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संसद मार्च के ऐलान के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
जंतर-मंतर पर त्रिस्तरीय सुरक्षा और भारी फोर्स:
10 हजार जवान मुस्तैद: जंतर-मंतर पर 5 से 6 हजार प्रदर्शनकारियों के जमावड़े को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। क्षेत्र में करीब 10,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।
आँसू गैस और ‘वज्र’ वाहन तैनात: किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आँसू गैस के गोले, लाठीधारी पुलिसबल और ‘वज्र’ वाहनों की तैनाती की गई है।
तीन लेयर की बैरिकेडिंग: जंतर-मंतर से संसद जाने वाले रास्तों पर तीन परत की सुरक्षा बैरिकेडिंग लगाई गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को किसी भी हाल में संसद की तरफ नहीं जाने दिया जाएगा और उनकी आवाजाही को अधिकतम ‘केरल भवन’ तक ही सीमित रखा जाएगा।
धारा 163 लागू, मार्च की अनुमति नहीं:
नई दिल्ली क्षेत्र में BNS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके तहत जंतर-मंतर को छोड़कर पूरे नई दिल्ली इलाके में 5 या उससे अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने पर पाबंदी है।
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि CJP को संसद मार्च की कोई अनुमति नहीं दी गई है। फिलहाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत जारी है। प्रशासन ने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नियमों का पालन करने की अपील की है।
इसी बीच, प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल में खुद को ‘गैर-कानूनी रूप से नजरबंद’ किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उनके आने-जाने, बोलने और लोगों से मिलने की आजादी छीन ली गई है।
वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी जारी कर अपना अनशन खत्म करने के लिए सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सामने निम्नलिखित 4 मुख्य शर्तें रखी हैं:
शिक्षा की नाकामियों की जिम्मेदारी: सरकार देश की शिक्षा व्यवस्था में हाल ही में हुई नाकामियों और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों की आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी ले।
संसद तक जाने की इजाजत: सोनम वांगचुक और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व को संसद भवन तक शांतिपूर्ण तरीके से जाने की अनुमति दी जाए।
संसद में मुद्दा उठाने का आश्वासन: विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और वरिष्ठ नेता उनसे मुलाकात कर यह भरोसा दिलाएं कि वे इन मुद्दों को संसद के भीतर प्रमुखता से उठाएंगे।
अस्पताल में आकर मिले नेतृत्व: यदि स्वास्थ्य कारणों या अन्य वजहों से वांगचुक का संसद तक जाना संभव न हो, तो विभिन्न दलों के प्रतिनिधि खुद अस्पताल आकर उनकी मांगों का समर्थन करें और उन्हें लिखित भरोसा दें।