अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर सख्त बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि यदि अमेरिका चाहता, तो पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद ईरानी नेतृत्व को एक ही हमले में निशाना बनाया जा सकता था। हालांकि, उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं किया गया क्योंकि फिर बातचीत के लिए कोई नेतृत्व नहीं बचता।
Axios को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “वे सभी एक ही जगह मौजूद हैं। हम चाहें तो एक ही शॉट में सबको खत्म कर सकते हैं, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उसके बाद बातचीत करने के लिए कोई नहीं रहेगा। वे समझौते के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।”
ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका और ईरान ने आपसी सहमति से खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक वार्ता पर एक सप्ताह का विराम देने का फैसला किया है। उनके मुताबिक, इस अवधि के दौरान दोनों पक्ष किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई से बचेंगे।
पूर्व ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में मौत के बाद से ही उनके अंतिम संस्कार को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं। इस्लामी परंपरा के अनुसार किसी व्यक्ति को मृत्यु के 24 घंटे के भीतर दफनाया जाता है, लेकिन युद्ध जैसी असाधारण परिस्थितियों के चलते यह संभव नहीं हो पाया और अंतिम संस्कार टालना पड़ा।
4 जुलाई की तारीख क्यों चुनी गई?
ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार की औपचारिक शुरुआत के लिए 4 जुलाई की तारीख तय की, जो संयोग से अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर के साथ मेल खाती है। अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित पवित्र शहर कोम में आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
खामेनेई की अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी ने दुनियाभर का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को भावुक होकर रोते देखा गया। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्हें लगा था कि ईरान के लोग खामेनेई को पसंद नहीं करते थे। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि “संभव है ये आंसू असली न हों।” इससे पहले ट्रंप यह दावा भी कर चुके हैं कि अमेरिका ने ईरान को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था।
अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में उनके बेटे मुज्तबा खामेनेई के शामिल होने को लेकर भी अटकलें तेज हैं। हालांकि, भारत में मुज्तबा खामेनेई के प्रतिनिधि ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से उनके सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना नहीं है।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, अयातुल्ला हकीम इलाही ने कहा कि इजरायल की ओर से संभावित सुरक्षा खतरों और निगरानी की आशंकाओं को देखते हुए मुज्तबा का सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना जोखिम भरा हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने अंतिम संस्कार की रस्मों से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है।