आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, डॉग लवर्स को नहीं मिली राहत

 

सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक संस्थानों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाने संबंधी अपने आदेश में बदलाव की मांग ठुकरा दी है। अदालत ने डॉग लवर्स द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसी जगहों से कुत्तों को हटाने का पहले दिया गया आदेश जारी रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह एनिमल वेलफेयर बोर्ड के SOP के खिलाफ दाखिल सभी याचिकाओं को खारिज कर रहा है। अदालत ने अपने 25 नवंबर के आदेश में किसी भी तरह का संशोधन करने से इनकार कर दिया, जिसमें स्कूल, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि पकड़े गए कुत्तों को वापस उन्हीं स्थानों पर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्यों को पहले ही एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए था, लेकिन ऐसा न होने के कारण आज यह स्थिति बनी है। कोर्ट के अनुसार यह मुद्दा केवल पशु कल्याण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ है।

डॉग बाइट की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए अदालत ने कहा कि कई राज्यों से गंभीर आंकड़े सामने आए हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर, सीकर, उदयपुर और भीलवाड़ा में ऐसे मामलों की जानकारी दी गई है। तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली है। दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर जनवरी से अब तक 31 डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए हैं। अदालत ने यह भी बताया कि कुछ विदेशी पर्यटकों के साथ भी कुत्तों के काटने की घटनाएं हुई हैं और देश में रैबीज से मौत के मामले भी चिंता बढ़ा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जो अधिकारी अदालत के निर्देशों को लागू कर रहे हैं, उन्हें अपना काम करने दिया जाना चाहिए और उनके कामकाज में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही ऐसे मामलों में हस्तक्षेप किया जाए। सभी हाई कोर्ट्स को निर्देशों के पालन की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अवमानना सहित जरूरी कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है।

कोर्ट ने आगे कहा कि जिन क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है, वहां विशेषज्ञों की सहायता से स्थिति को नियंत्रित किया जाए। साथ ही, जिन संक्रमित या गंभीर रूप से बीमार कुत्तों का इलाज संभव नहीं है और जो सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा बन चुके हैं, उनके मामले में यूथेनेशिया जैसे विकल्प पर विचार किया जा सकता है।

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