क्या भारत तक पहुंच सकता है इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन? जानिए कितना खतरनाक है यह वायरस

 

अफ्रीका के कांगो और युगांडा में इबोला वायरस के नए मामलों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्थिति को गंभीर मानते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है। इस बार संक्रमण के लिए इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिससे कई लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भारत सहित कई देशों में इस वायरस को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

कैसे फैलता है इबोला वायरस?

अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, इबोला एक गंभीर और कई बार जानलेवा संक्रमण है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले फ्लूइड्स के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इनमें खून, पसीना, उल्टी, लार, यूरिन और अन्य शारीरिक तरल पदार्थ शामिल हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस कोविड-19 की तरह हवा के जरिए तेजी से नहीं फैलता, लेकिन संक्रमित व्यक्ति या उसके शरीर के फ्लूइड्स के संपर्क में आने पर संक्रमण का खतरा काफी अधिक रहता है।

क्या इबोला से जान का खतरा है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, बुंडीबुग्यो स्ट्रेन ऑर्थोइबोलावायरस परिवार का हिस्सा है और यही इबोला संक्रमण का कारण बनता है। यह वायरस बेहद खतरनाक माना जाता है और कई मामलों में इसकी मृत्यु दर 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, मौजूदा प्रकोप में अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि संदिग्ध संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

इबोला के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला की शुरुआत सामान्य वायरल संक्रमण जैसी दिखाई दे सकती है। मरीज में तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी, सिरदर्द और गले में खराश जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।

हालांकि संक्रमण बढ़ने के साथ स्थिति गंभीर हो सकती है। मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और शरीर के अंदर तथा बाहर ब्लीडिंग जैसी समस्याएं होने लगती हैं। कई मामलों में उल्टी और मल के साथ खून आना, नाक और मसूड़ों से खून बहना जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस दिमाग पर भी असर डाल सकता है, जिससे मरीज में भ्रम, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और आक्रामक व्यवहार जैसी मानसिक समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।

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