POK में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई, रावलाकोट में ड्रोन और रॉकेट हमले का दावा; कई लोगों की मौत

 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच तनाव गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। बुनियादी सुविधाओं और अपने अधिकारों की मांग को लेकर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। रावलाकोट में हुई हिंसक घटना को लेकर दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के लिए रॉकेट और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन हमलों और हताहतों की संख्या की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

रावलाकोट, POK की राजधानी मुजफ्फराबाद से करीब 41 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सामने आए विवरणों के मुताबिक, यहां पिछले कई महीनों से स्थानीय लोग अपने नागरिक अधिकारों, बुनियादी सुविधाओं और अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह आंदोलन करीब पांच महीने से जारी है। इसी बीच सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।

बस टर्मिनल पर जुटे थे सैकड़ों प्रदर्शनकारी

जानकारी के अनुसार, घटना वाले दिन सुबह बड़ी संख्या में लोग रावलाकोट के बस टर्मिनल पर एकत्र हुए थे। वे अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे थे। आरोप है कि प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही वहां तैनात पाकिस्तानी रेंजर्स ने भीड़ पर RPG-7 रॉकेट से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से किए जा रहे दावों में कहा गया है कि इसके बाद सुरक्षा बलों की ओर से प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की गई। आरोप यह भी है कि जान बचाकर भाग रहे लोगों को निशाना बनाया गया। हालांकि, घटना के पूरे क्रम और हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों को लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने आना बाकी है।

घायलों की मदद करने वालों पर भी फायरिंग का आरोप

इस घटना को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह है कि गोलीबारी में घायल हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे नागरिकों को भी निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि कुछ लोग घायलों को उठाकर वहां से ले जाने का प्रयास कर रहे थे, तभी उन पर भी गोलियां चलाई गईं। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय अधिकारों से जुड़ा बेहद गंभीर मामला होगा।

दिए गए विवरणों में पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस की कार्रवाई में 18 लोगों की मौत होने का दावा किया गया है। मृतकों में चार बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, मृतकों की संख्या, उनकी पहचान और घटना में बच्चों की मौत से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

पांच महीने से जारी है अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन

POK में स्थानीय आबादी की ओर से लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं, नागरिक अधिकारों और सरकारी नीतियों को लेकर असंतोष जताया जाता रहा है। रावलाकोट की घटना ने एक बार फिर इस सवाल को चर्चा में ला दिया है कि अपने अधिकारों की मांग करने वाले नागरिकों के साथ सुरक्षा बलों का व्यवहार कैसा होना चाहिए।

फिलहाल इस घटना से जुड़े सभी दावों की निष्पक्ष जांच और स्वतंत्र पुष्टि बेहद जरूरी है। साथ ही, हिंसा में घायल लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। रावलाकोट में हुई कथित कार्रवाई ने POK में जारी असंतोष और पाकिस्तान प्रशासन के सामने खड़ी चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

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