राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए प्रदर्शनों के कानूनी घटनाक्रम में एक बड़ा मोड़ आया है। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच CJP प्रदर्शन के दौरान दर्ज की गईं 13 एफआईआर (FIR) को पूरी तरह रद्द करने की सिफारिश की है। पुलिस ने यह कदम यशोवर्धन आजाद और अन्य से जुड़ी याचिका के तहत उठाया है।
31 अगस्त 2026 को दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर अजय कृष्ण शर्मा के हलफनामे के साथ दायर इस अर्जी में केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले का हवाला दिया गया है। पुलिस का कहना है कि सरकार के रुख के बाद अब वह इन मामलों में आगे कार्रवाई जारी नहीं रखना चाहती। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिलने वाली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया गया है।
दंगा और तोड़फोड़ से जुड़ी थीं एफआईआर
अदालत में सौंपे गए आंकड़ों के अनुसार, ये 13 FIR 21, 22, 25 और 26 जुलाई को विभिन्न थानों में दर्ज की गई थीं। इनमें दंगा भड़काने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हत्या के प्रयास और लूट जैसे गंभीर आरोप शामिल थे।
2,873 लोगों की अलग से होगी जांच
हालांकि, पुलिस ने यह साफ किया है कि प्रदर्शन में शामिल 2,873 ऐसे लोगों को राहत नहीं दी जाएगी, जिनका पहले से गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के आधार पर पहचाने गए इन लोगों के खिलाफ पुलिस ने एक अलग और नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी है। इस नई जांच का दायरा केवल यह पता लगाने तक सीमित होगा कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा या संपत्ति के नुकसान में इनकी क्या भूमिका थी।
पुलिस ने अदालत को यह भरोसा भी दिया है कि इस घटनाक्रम से जुड़ी कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी और यदि अन्य समान मामले सामने आते हैं, तो पुलिस राहत याचिका का विरोध नहीं करेगी।