इंडोनेशिया में विनाशकारी भूकंप से हाहाकार: 53 लोगों की मौत, 995 से ज़्यादा आफ्टरशॉक्स के खौफ से सड़कों पर रात बिता रहे लोग

 

इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में शनिवार तड़के आए 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। आपदा के दूसरे दिन रविवार को राहत एवं बचाव कार्य तेज करते हुए रेस्क्यू टीमों ने मलबे से 6 और शव बरामद किए, जिससे मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 53 हो गया है। भूकंप के कारण हुए भूस्खलन और लगातार आ रहे 995 से अधिक आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) की वजह से हजारों लोग खुले आसमान के नीचे रातें बिताने को मजबूर हैं।

10 KM की गहराई में था केंद्र, सुनामी की दहशत से भागे लोग

यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, भूकंप शनिवार सुबह 6 बजे से ठीक पहले आया, जिसका केंद्र सतह से महज 10 किलोमीटर गहराई पर था।

सुनामी अलर्ट: भूकंप के तुरंत बाद तटीय इलाकों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई, जिसके बाद लोग घबराकर ऊंची जगहों की ओर भागे। हालांकि बाद में चेतावनी वापस ले ली गई।

995 आफ्टरशॉक्स: नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेंसी के मुताबिक, अब तक 995 से ज्यादा आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 46 झटके बेहद तेज थे।

घायलों की संख्या: हादसे में 135 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।

  • 1,350 से ज्यादा घर तबाह, 5,000 लोग बेघर
  • ईस्ट नुसा तेंगारा प्रांत और कैथोलिक बहुल फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सबसे भयानक असर देखा गया।
  • अकेले फ्लोरेस इलाके में 241 घर पूरी तरह जमींदोज हो गए।
  • पूरे प्रांत में लगभग 900 मकान पूरी तरह तबाह और 450 क्षतिग्रस्त हुए हैं।

करीब 5,000 प्रभावितों को अस्थायी राहत शिविरों में शरण दी गई है। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लाबुआन बाजो (कोमोडो नेशनल पार्क का प्रवेश द्वार) में भी पर्यटकों व स्थानीय निवासियों ने आफ्टरशॉक्स के डर से रातें टेंट और सड़कों पर गुजारीं।

ट्रांस-फ्लोरेस हाईवे ब्लॉक, बिजली व नेटवर्क ठप

भूकंप के कारण हुए लैंडस्लाइड से 700 किलोमीटर लंबा ‘ट्रांस-फ्लोरेस हाईवे’ कई जगहों पर बंद हो गया, जिससे पहाड़ी समुदायों का संपर्क टूट गया था।

सर्च-एंड-रेस्क्यू अधिकारी फथुर रहमान ने बताया कि मंगराई, पूर्वी मंगराई और नागेकेओ जैसे दूर-दराज के इलाकों में सड़कें साफ कर दी गई हैं, लेकिन बिजली गुल होने और टेलीकॉम नेटवर्क ठप पड़ने से रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

राहत सामग्री का वितरण तेज, रिंग ऑफ फायर की बड़ी आपदा

प्रभावितों तक चावल, पीने का पानी, रेडी-टू-ईट मील, दवाइयां और कंबल पहुंचाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि इंडोनेशिया पैसिफिक “रिंग ऑफ फायर” (Ring of Fire) पर बसा है, जहाँ अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। इससे पहले 1992 में फ्लोरेस में आए भूकंप और सुनामी ने 2,500 लोगों की जान ली थी, वहीं 2004 की सुमात्रा सुनामी में हिंद महासागर क्षेत्र के 2.3 लाख लोगों की मौत हुई थी।

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