इंदिरा एकादशी पर पितरों के लिए जरूर जलाएं दीपक, इन 4 जगहों पर दीपदान की है मान्यता

 

पितृ पक्ष के दौरान आने वाली इंदिरा एकादशी का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के साथ पितरों की शांति के लिए भी कई तरह के धार्मिक उपाय किए जाते हैं। मान्यता है कि इंदिरा एकादशी की शाम श्रद्धापूर्वक दीपदान करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

पंचांग के अनुसार, 6 अक्टूबर 2026 को इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ पितरों का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है। शाम के समय कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से पितृ दोष से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है।

1. घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक

इंदिरा एकादशी की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दीपक जलाते समय पितरों का स्मरण और प्रार्थना की जा सकती है।

2. पीपल के पेड़ के नीचे करें दीपदान

पितृ पक्ष में पीपल के वृक्ष का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। इंदिरा एकादशी की शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

3. घर के पूजा स्थान पर जलाएं दीपक

शाम की पूजा के समय घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान विष्णु और अपने पूर्वजों का ध्यान करें। श्रद्धा के साथ की गई पूजा को परिवार की सुख-समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।

4. दक्षिण दिशा में दीपक जलाना

धार्मिक मान्यताओं में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। इसलिए इंदिरा एकादशी की शाम घर में सुरक्षित स्थान पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाकर पितरों का स्मरण किया जा सकता है।

पितरों का करें स्मरण

इंदिरा एकादशी पर दीपदान करते समय मन में अपने पूर्वजों को याद करें और उनकी शांति के लिए प्रार्थना करें। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ऐसे कर्मों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

नोट: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। इसे आस्था के रूप में ही लें।

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