भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर कड़ा रुख अपनाते हुए उसे आईना दिखाया और उसके इतिहास को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर किया। भारत ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसका हिंसक और अमानवीय रवैया दशकों से अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने की कोशिशों को दर्शाता है।
बुधवार को UNSC में “सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों की सुरक्षा” विषय पर हुई वार्षिक खुली बहस के दौरान भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश परवथानेनी ने कहा कि यह बेहद विरोधाभासी है कि नरसंहार जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े इतिहास वाला पाकिस्तान आज भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी कर रहा है।
पाकिस्तान की ओर से बहस के दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत ने यह प्रतिक्रिया दी। राजदूत परवथानेनी ने आगे कहा कि दुनिया यह नहीं भूल सकती कि इस वर्ष मार्च में रमजान के दौरान पाकिस्तान ने काबुल स्थित ओमिद नशा मुक्ति अस्पताल पर हमला किया था, जो शांति और मानवता के समय में किया गया एक गंभीर कृत्य था।
उन्होंने आगे कहा कि यूएनएएमए (अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन) के अनुसार इस हिंसक और अमानवीय हमले में 269 निर्दोष नागरिकों की मौत हुई, जबकि 122 लोग घायल हुए। यह हमला ऐसी इमारत पर किया गया था, जिसे किसी भी स्थिति में सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता।
राजदूत पर्वथानेनी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों की बात करने वाला पाकिस्तान स्वयं अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाकर गंभीर पाखंड का परिचय देता है।