UGC-NET परीक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जून में आयोजित हुई तीन प्रमुख विषयों—सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स—की UGC-NET परीक्षाओं को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा लगभग दो महीने बाद रद्द कर दिए जाने पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और NTA के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी भड़ास निकालते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि NTA द्वारा गलत प्रश्नपत्र तैयार करने और पुराने प्रश्नों को दोहराने की वजह से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है। अब इन छात्रों को सितंबर में दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी।
“गलती एजेंसी करे और कीमत चुकाए देश का युवा
राहुल गांधी ने अभ्यर्थियों की समस्याओं को रेखांकित करते हुए लिखा कि सालों की कड़ी मेहनत, भारी-भरकम फीस भरने और दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक का सफर तय करने के बाद छात्रों को सिर्फ अनिश्चितता मिली है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा:
गलती NTA करती है, लेकिन उसकी सजा देश के निर्दोष छात्रों को भुगतनी पड़ती है। देश में अब शिक्षा व्यवस्था बची ही नहीं है। यह सिर्फ एक ‘एक्सट्रैक्शन मशीन’ (पैसे व मानसिक शांति निचोड़ने वाली मशीन) बन चुकी है, जो युवाओं से उनका पैसा, कीमती साल, मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास छीन लेती है, लेकिन बदले में नौकरी तक नहीं देती।”
पेपर लीक की आशंका पर दागे तीखे सवाल
राहुल गांधी ने NTA की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या 22 से 30 जून के बीच हुई ये परीक्षाएं रद्द करने के पीछे केवल गलत प्रश्नपत्र ही वजह है या फिर परीक्षा से पहले ही पेपर लीक हो चुके थे? उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के अन्य विभागों की तरह NTA भी कभी अपनी नाकामियों और गलतियों को स्वीकार नहीं करती।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल पहला कदम था
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि हमेशा की तरह इस बार भी किसी भी बड़े अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो महज एक शुरुआती कदम था, अब NTA के शीर्ष नेतृत्व और पूरी संस्था की जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि देश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ रोका जा सके।