नई दिल्ली:** NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच में CBI को बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीषा संजय हवलदार की हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के अतिरिक्त नमूने लेने की केंद्रीय जांच एजेंसी को अनुमति दे दी है।
स्पेशल सीबीआई जज अजय गुप्ता ने CBI की ओर से दायर आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह मंजूरी दी। जांच एजेंसी ने अदालत से नए नमूने लेने की अनुमति मांगी थी, क्योंकि फोरेंसिक जांच के लिए पहले जुटाए गए हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के नमूने पर्याप्त नहीं पाए गए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले से संबंधित दस्तावेजों की संख्या काफी ज्यादा है। साथ ही, ग्राफिक एक्सपर्ट्स और डॉक्यूमेंट एग्जामिनेशन से जुड़ी विशेषज्ञ एजेंसी GEQD ने भी स्पष्ट किया है कि पहले लिए गए नमूने तुलना और फोरेंसिक जांच के लिहाज से पर्याप्त नहीं हैं।
कोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए निष्पक्ष और प्रभावी जांच के हित में CBI को आरोपी के हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर के अतिरिक्त नमूने लेने की अनुमति प्रदान कर दी।
फोरेंसिक जांच के लिए नए नमूनों की जरूरत
CBI ने अदालत के सामने दलील दी कि दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच और हैंडराइटिंग व हस्ताक्षर की तुलना के लिए आरोपी के अतिरिक्त नमूने जरूरी हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, उपलब्ध नमूनों से विशेषज्ञों को सही तरीके से तुलना करने में पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है।
बचाव पक्ष ने अतिरिक्त नमूने लेने का किया विरोध
दूसरी ओर, आरोपी की तरफ से अदालत में पेश वकील ने CBI की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने कहा कि जांच एजेंसी अपने आवेदन में यह ठोस वजह नहीं बता सकी है कि पहले से लिए गए नमूने तुलना के लिए पर्याप्त क्यों नहीं हैं।
वकील ने बताया कि आरोपी से पहले ही करीब 60 पन्नों पर लिखवाया जा चुका है। ऐसे में CBI को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पहले लिए गए नमूनों में ऐसी क्या कमी है, जिसके चलते नए नमूनों की आवश्यकता महसूस हो रही है।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी वरिष्ठ नागरिक हैं और बार-बार हैंडराइटिंग सैंपल देने की प्रक्रिया से उन्हें अनावश्यक परेशानी हो सकती है। वकील के अनुसार, आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग किया है और CBI के निर्देश पर मांगी गई सभी लिखित सामग्री उपलब्ध कराई है।