भारतीय यूथ कांग्रेस ने संगठन के भीतर अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सात राज्यों के 200 से ज्यादा पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ महारैली’ में शामिल नहीं होने और कार्यक्रम को लेकर उदासीनता दिखाने के आरोप में इन नेताओं को निलंबित किया गया है। यह रैली विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित की गई थी। संगठन की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, निलंबित किए गए पदाधिकारी गुजरात, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, मध्य प्रदेश और झारखंड से संबंधित हैं। इनमें प्रदेश यूथ कांग्रेस के उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिव स्तर के नेता भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि रैली जैसे महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्यक्रम में अपेक्षित भागीदारी नहीं होने को संगठन ने गंभीरता से लिया है।
मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा पदाधिकारियों पर गिरी गाज
यूथ कांग्रेस की ओर से की गई कार्रवाई में मध्य प्रदेश सबसे ऊपर है। यहां कुल 60 पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा गुजरात में 49, झारखंड में 32 और पश्चिम बंगाल में 26 पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
वहीं तेलंगाना में 14, उत्तर प्रदेश (मध्य) में 11 और हरियाणा में 10 पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है। इस तरह सात राज्यों को मिलाकर कुल 202 पदाधिकारियों पर संगठनात्मक कार्रवाई की गई है।
रैली में शामिल नहीं होने पर मांगा गया था जवाब
सूत्रों के अनुसार, जिन पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है, उनसे रैली में भागीदारी को लेकर उनकी भूमिका और अनुपस्थिति के बारे में जवाब मांगा गया था। संगठन यह जानना चाहता था कि इतने बड़े राजनीतिक आयोजन में संबंधित पदाधिकारियों की सक्रियता अपेक्षा के अनुरूप क्यों नहीं रही।
बताया जा रहा है कि कई पदाधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब संगठन को संतोषजनक नहीं लगे। इसके बाद उनके खिलाफ निलंबन का फैसला लिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर संगठन की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने की जानकारी नहीं है।
संगठन में अनुशासन का संदेश देने की कोशिश
इस कार्रवाई को यूथ कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक जिम्मेदारी और अनुशासन को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक संगठनों में बड़े कार्यक्रमों के दौरान पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में सात राज्यों के 202 नेताओं पर एक साथ हुई कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि संगठन अपनी जिम्मेदारियों को लेकर लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकता है।
फिलहाल इस पूरे मामले में आगे संगठन क्या कदम उठाता है और निलंबित पदाधिकारियों को अपना पक्ष रखने का कोई और अवसर मिलता है या नहीं, इस पर नजर बनी हुई है।