उत्तर प्रदेश में अवैध अतिक्रमण और सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत प्रशासन की ओर से लगातार बुलडोजर कार्रवाई जारी है। राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार, सार्वजनिक मार्गों को चौड़ा करने और अवैध निर्माण हटाने के लिए कई स्थानों पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
इसी क्रम में वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण को लेकर कार्रवाई तेज कर दी गई है। अब तक यहां 70 से अधिक मकान और इमारतें हटाई जा चुकी हैं। इस अभियान के तहत क्षेत्र की छह मस्जिदें भी प्रभावित हुई हैं, जिन्हें लेकर प्रशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, पीलीभात क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के एक कथित अवैध कार्यालय को भी ध्वस्त कर दिया गया है। इसके अलावा हापुड़ में एक सपा नेता के अवैध रूप से बने आलीशान मकान पर भी बुलडोजर चलाकर उसे गिरा दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान नियमों के उल्लंघन और अवैध निर्माण के खिलाफ लगातार जारी रहेगा।
वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में चल रहे सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत प्रशासन ने छह मस्जिदों पर कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित मस्जिद कमेटियों को स्थान खाली करने और शिफ्टिंग की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद किसी भी समय ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
स्थिति को देखते हुए इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
जिन छह मस्जिदों को इस कार्रवाई के दायरे में बताया जा रहा है, उनमें लंगड़े हाफिज मस्जिद, संगमरमर वाली मस्जिद, अली रजा खान मस्जिद, निसारन मस्जिद, शाह मस्जिद और करीमुल्लाह बेग मस्जिद शामिल हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम सड़क विस्तार परियोजना को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत बड़ी संख्या में निर्माण हटाए जा रहे हैं। यह इलाका कभी पूर्वांचल के प्रमुख बाजारों में गिना जाता था, लेकिन अब यहां बड़े स्तर पर तोड़फोड़ की कार्रवाई जारी है। प्रशासन की ओर से कुल 187 मकानों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से अब तक लगभग 70 मकान ध्वस्त किए जा चुके हैं।
उधर, हापुड़ में समाजवादी पार्टी के नेता अय्यूब सिद्दीकी के आवास पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। बताया जा रहा है कि उनका मकान तालाब की जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया था, जिसके चलते प्रशासन ने उसे गिरा दिया।
इस कार्रवाई के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया है कि प्रशासन विपक्ष से जुड़े लोगों और विशेष समुदाय को निशाना बना रहा है, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से इसे अवैध निर्माण के खिलाफ सामान्य कार्रवाई बताया जा रहा है।