नई दिल्ली: ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। अदालत ने चुनाव आयोग को विवाद पर अंतिम फैसला लेने के लिए समय-सीमा तय कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपने एफिडेविट और काउंटर-एफिडेविट दाखिल करने होंगे। इसके बाद चुनाव आयोग को मामले का निपटारा करने के लिए तीन महीने का समय मिलेगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया चार महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
चार हफ्ते में पूरी करनी होगी प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों गुट पहले अपनी दलीलें और जवाब निर्धारित अवधि में दाखिल करें। इसके बाद मामला चुनाव आयोग के पास अंतिम सुनवाई और निर्णय के लिए जाएगा। यह विवाद चुनाव चिह्न आवंटन से जुड़े नियमों के तहत आयोग के समक्ष लंबित है। अदालत ने फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय व्यक्त नहीं की है।
‘फूल और घास’ चिह्न पर रोक
दरअसल, चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग के अनुसार, पार्टी के भीतर दो गुट अपने-अपने पक्ष को AITC का प्रतिनिधि बता रहे हैं।
उपचुनाव में अलग-अलग नाम और चिह्न
आगामी पश्चिम बंगाल उपचुनाव को देखते हुए आयोग ने दोनों गुटों के लिए अलग पहचान तय की है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं अरूप रॉय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिह्न आवंटित किया गया है।
अब दोनों पक्षों की दलीलों और चुनाव आयोग के अंतिम फैसले पर इस विवाद की आगे की दिशा निर्भर करेगी।