लंबे समय से विवादों में घिरी दिलजीत दोसांझ की फिल्म *Punjab 95* आखिरकार रिलीज हो गई है। हालांकि, रिलीज से पहले इसका नाम बदलकर *Satluj* कर दिया गया। ZEE5 पर आई यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि पंजाब के उस दर्दनाक दौर की झलक दिखाती है, जिसे देखकर आप भावुक और बेचैन हो जाएंगे। फिल्म कई ऐसे सवाल खड़े करती है, जो लंबे समय तक आपके जेहन में बने रहते हैं।
फिल्म की कहानी 1995 के पंजाब में सेट है। जसवंत सिंह, जो एक बैंक कर्मचारी हैं, तब न्याय की लड़ाई में उतरते हैं जब उनका एक करीबी रिश्तेदार अचानक लापता हो जाता है। वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। सच की तलाश में निकले जसवंत के सामने एक ऐसा भयावह सच आता है, जो उन्हें भीतर तक झकझोर देता है।
उन्हें पता चलता है कि आतंकवाद के खिलाफ अभियान के नाम पर कई बेगुनाह लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और हजारों लोगों की जान जा चुकी है। इसके बाद जसवंत सिंह चुप नहीं बैठते। वह मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने का फैसला करते हैं और एक ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट बन जाते हैं। इसके बाद उनकी जिंदगी जिस मोड़ पर पहुंचती है, वह फिल्म को बेहद मार्मिक और दिल दहला देने वाला बना देती है।
कैसी है फिल्म?
एक बेहद भावनात्मक और झकझोर देने वाली फिल्म है, जिसे देखते हुए आप कई बार बेचैन हो जाएंगे। खासकर पंजाब से जुड़े लोगों के लिए यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक दर्दनाक एहसास बनकर सामने आती है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।
करीब 2 घंटे 45 मिनट लंबी यह फिल्म कहीं भी बोझिल नहीं लगती। हर सीन आपको 1995 के पंजाब की उस भयावह दुनिया में ले जाता है, जहां डर, दर्द और बेबसी का माहौल है। फिल्म के कई दृश्य अंदर तक झकझोर देते हैं। एक सीन में जब एक पुलिस अधिकारी एक मां से कहता है, *”अक्कड़-बक्कड़ खेलता हूं, जिस हाथ में बंदूक आएगी, वही तय करेगा कि तेरा बेटा जिंदा रहेगा या नहीं,”* तो यह संवाद रोंगटे खड़े कर देता है और व्यवस्था के प्रति गुस्सा पैदा करता है।
दिलजीत दोसांझ के टॉर्चर वाले दृश्य भी काफी असर छोड़ते हैं और दर्शक उनकी पीड़ा को महसूस करने लगते हैं। फिल्म का प्रोडक्शन डिजाइन और सेटिंग इतनी शानदार है कि आपको सचमुच ऐसा महसूस होता है जैसे आप 1995 के पंजाब में पहुंच गए हों। वहीं, बैकग्राउंड स्कोर और खास तौर पर “कुर्बानी” जैसे गीतों का इस्तेमाल फिल्म के भावनात्मक असर को और गहरा कर देता है।
यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बनाई गई है। यह उन दर्दनाक घटनाओं और भावनाओं को सामने लाने की कोशिश करती है, जिन पर लंबे समय तक खुलकर बात नहीं हो सकी। रिलीज से पहले फिल्म को लेकर काफी विवाद हुए और लंबे समय तक इसकी रिलीज अटकी रही, लेकिन अब ZEE5 पर आने के बाद इसे दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिला है।
चाहे इस विषय पर आपकी कोई भी राय हो, लेकिन इस तरह की फिल्मों को कम से कम एक मौका जरूर दिया जाना चाहिए। क्योंकि जब तक दर्शक ऐसे साहसी और अलग विषयों पर बनी फिल्मों को समर्थन नहीं देंगे, तब तक फिल्म निर्माता भी ऐसे जोखिम उठाने से बचेंगे।