पितृ पक्ष में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है और इसी के साथ पितृ पक्ष का समापन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन उन सभी पूर्वजों को समर्पित होता है, जिनका श्राद्ध किसी कारणवश उनकी निर्धारित तिथि पर नहीं किया जा सका। ऐसे में सर्वपितृ अमावस्या पर श्रद्धा और विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण तथा पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।
सर्वपितृ अमावस्या को सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या और महालय अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, तो इस दिन उनका श्राद्ध किया जा सकता है। इसी वजह से पितृ पक्ष की सभी तिथियों में इस अमावस्या को विशेष स्थान दिया गया है।
2026 में कब मनाई जाएगी सर्वपितृ अमावस्या?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। इस दिन अमावस्या तिथि रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। पितरों के निमित्त किए जाने वाले धार्मिक कर्मकांड के लिए दिन का अपराह्न काल विशेष माना जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध का शुभ समय
10 अक्टूबर को श्राद्ध और तर्पण के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
– कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक
– रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:31 बजे से 1:18 बजे तक
– अपराह्न काल: दोपहर 1:18 बजे से 3:37 बजे तक
इन समयावधियों में पितरों के लिए श्राद्ध कर्म करना शुभ माना जाता है।
क्यों खास है सर्वपितृ अमावस्या?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या उन पितरों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी श्राद्ध तिथि याद नहीं है या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया। इस दिन परिवार के सभी ज्ञात और अज्ञात पितरों का स्मरण कर उन्हें तर्पण और पिंडदान अर्पित किया जाता है।
गरुड़ पुराण से जुड़ी मान्यताओं में भी पितरों के निमित्त किए जाने वाले कर्मों को महत्वपूर्ण बताया गया है। कहा जाता है कि श्रद्धापूर्वक किया गया श्राद्ध पितरों को संतुष्टि प्रदान करता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। इसलिए पितृ पक्ष के अंतिम दिन लोग अपने पूर्वजों का स्मरण कर उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।