फ्रांस में विरोध प्रदर्शन ने पकड़ा जोर, कई शहरों में बवाल; मैक्रों की अपील के बाद भी नहीं थमा आंदोलन

 

फ्रांस में सरकार के खिलाफ लोगों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी है और कई जगहों पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। राजधानी पेरिस सहित कई शहरों में प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प हुई। इस दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और दुकानों में लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं। बिगड़ती स्थिति के बीच सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है, लेकिन आंदोलन को शांत कराने की कोशिशों को अब तक खास सफलता नहीं मिली है।

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन खत्म करने और शांति बनाए रखने की अपील की है। हालांकि, उनकी अपील के बावजूद सड़कों पर विरोध का सिलसिला जारी है। प्रदर्शन में छात्रों के साथ अन्य वर्गों की भागीदारी भी बढ़ने की बात सामने आई है।

कई शहरों में पुलिस ने संभाला मोर्चा

फ्रांस में शनिवार को प्रदर्शन के दौरान कई शहरों में पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने पड़े। पेरिस, लियोन, क्लेरमोंट-फेरां और स्ट्रासबर्ग में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वहीं, नीस और नांतेस में प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वॉटर कैनन का सहारा लिया गया।

कुछ स्थानों पर प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। आगजनी और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं के साथ पुलिसकर्मियों पर हमले की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, 70 हजार से अधिक जवान तैनात

हिंसा की आशंका और लगातार जारी विरोध को देखते हुए फ्रांस में 70 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। संवेदनशील इलाकों में हेलीकॉप्टर और बख्तरबंद वाहनों के जरिए निगरानी की जा रही है। पुलिस आंसू गैस और वॉटर कैनन की मदद से भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है।

इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद आंदोलन जारी रहने से सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

स्कूलों की समस्या से शुरू हुआ विरोध, अब कई मांगें शामिल

इस आंदोलन की शुरुआत स्कूलों में शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों को लेकर हुई थी। शुरुआत में छात्रों ने इन मुद्दों पर आवाज उठाई, लेकिन बाद में विरोध का दायरा बढ़ गया। अब वेतन, पेंशन और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे भी आंदोलन के केंद्र में आ गए हैं।

इस बदलाव से साफ है कि प्रदर्शन अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। सरकार के सामने चुनौती सिर्फ हिंसा रोकने की नहीं, बल्कि प्रदर्शनकारियों की नाराजगी दूर करने की भी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि मैक्रों सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और देश में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कौन से कदम उठाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *