पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर सियासी संघर्ष तेज होता जा रहा है। इसी बीच पेशावर हाईकोर्ट के एक फैसले ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अदालत ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी समेत पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के 28 नेताओं की गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही नेताओं की अंतरिम जमानत से संबंधित याचिकाओं को डिवीजन बेंच के पास भेजने का निर्देश दिया गया है।
इस मामले में अगली सुनवाई 20 अक्टूबर को होगी। अदालत के इस रुख से PTI नेताओं को फिलहाल राहत मिली है। वहीं, इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच यह घटनाक्रम पाकिस्तान की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।
इमरान की रिहाई के लिए सड़कों पर उतरे PTI समर्थक
पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर उनकी पार्टी लगातार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। PTI की ओर से लॉन्ग मार्च निकाला जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में समर्थक शामिल होकर पूर्व प्रधानमंत्री की रिहाई की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का मार्च इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहा है, जिससे राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की चिंता बढ़ गई है।
पार्टी समर्थकों के इस प्रदर्शन ने शहबाज शरीफ सरकार के सामने राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। इमरान खान की रिहाई का मुद्दा लगातार जोर पकड़ रहा है और PTI अपने आंदोलन के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
इस्लामाबाद के रास्तों पर कंटेनर तैनात
PTI के लॉन्ग मार्च को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा के इंतजाम तेज कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों की आवाजाही रोकने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए शहर की सीमाओं पर बड़े-बड़े कंटेनर लगाए गए हैं। सरकार की कोशिश है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान राजधानी में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए।
20 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
सुहैल अफरीदी समेत 28 PTI नेताओं को गिरफ्तारी से मिली राहत के मामले में अब 20 अक्टूबर का दिन अहम होगा। पेशावर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल अदालत ने गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया है और अंतरिम जमानत याचिकाओं को डिवीजन बेंच के पास भेज दिया है।
एक ओर PTI का आंदोलन जारी है, तो दूसरी ओर अदालत में नेताओं से जुड़े मामले आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में इमरान खान की रिहाई की मांग, लॉन्ग मार्च और न्यायिक कार्यवाही आने वाले दिनों में पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल को और प्रभावित कर सकती है।