ईरान के साथ संभावित रूप से फिर से युद्ध शुरू होने की अटकलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तेवर दिखाते हुए कहा कि यदि ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया गया होता, तो सैन्य कार्रवाई के लिए यह पर्याप्त कारण होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और सैनिकों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर सवाल उठाते हुए ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाइयों ने उसके रक्षा ढांचे को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब प्रभावी नौसैनिक और वायु शक्ति नहीं बची है तथा उसके कई प्रमुख सैन्य नेताओं और कमांडरों को समाप्त कर दिया गया है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि कुछ मीडिया संस्थान ईरान की स्थिति को वास्तविकता से बेहतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि जमीनी हालात इससे बिल्कुल अलग हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान के बड़ी संख्या में नौसैनिक पोत नष्ट किए जा चुके हैं। उनके अनुसार, इन जहाजों के अवशेष अब समुद्र की गहराइयों में पड़े हैं और अमेरिका के पास इसके सबूत के तौर पर तस्वीरें भी मौजूद हैं। ट्रम्प ने कहा कि युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने निर्णायक बढ़त हासिल की थी और ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
अपने बयान में ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी संभावित खतरे को हल्के में नहीं लेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाना जारी रखेगा। उनके इस बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर, ईरान ने क्षेत्रीय तनाव को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की, तो इसका दायरा केवल लेबनान तक सीमित नहीं रहेगा। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऐसी स्थिति में खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों को भी संघर्ष की चपेट में आना पड़ सकता है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने और व्यापक युद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय शक्तियां क्षेत्र में शांति बहाल करने के प्रयासों में जुटी हुई हैं। हाल ही में अमेरिकी मध्यस्थता के बाद लेबनान में नए युद्धविराम की घोषणा की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। युद्धविराम के बावजूद इजरायल और हिजबुल्ला के बीच अविश्वास कायम है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े नजर आ रहे हैं।
इजरायल ने साफ कर दिया है कि वह मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए लेबनान से अपनी सेना वापस नहीं बुलाएगा। इजरायली नेतृत्व का कहना है कि हिजबुल्ला उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है और जब तक इस खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेगा। इजरायल ने यह भी संकेत दिया है कि वह सीमा क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखेगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई करेगा।