जांच में यह सामने आया है कि इस मामले में शामिल सभी आरोपी कथित तौर पर आतंकी संगठन Ansar Ghazwat-ul-Hind से जुड़े हुए थे, जिसे Al-Qaeda in the Indian Subcontinent का सहयोगी संगठन माना जाता है। गृह मंत्रालय ने जून 2018 में AQIS और उससे जुड़े संगठनों को आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित किया था।
NIA की चार्जशीट में मुख्य आरोपी के तौर पर पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी का नाम शामिल है, जिसकी इस मामले से जुड़ी मौत हो चुकी है। बताया गया है कि वह हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिसिन विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम कर चुका था। इसी आधार पर एजेंसी ने अदालत से उसके खिलाफ आरोप समाप्त करने का प्रस्ताव भी दिया है।
इस मामले में चार्जशीट में कई अन्य नाम भी शामिल हैं, जिनमें आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजामिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, शोएब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार शामिल बताए गए हैं।
कई राज्यों में फैली जांच, UAPA और BNS के तहत केस
NIA ने यह चार्जशीट UAPA, BNS और अन्य संबंधित धाराओं के तहत दाखिल की है। जांच की प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-NCR सहित कई राज्यों में फैली रही है, जहां अलग-अलग स्तर पर पड़ताल की गई।
588 गवाह, सैकड़ों दस्तावेज और जब्त सामग्री सबूत में शामिल
जांच एजेंसी के अनुसार इस पूरे मामले में बड़े पैमाने पर सबूत इकट्ठा किए गए हैं, जिनमें करीब 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपी संगठन Ansar Ghazwat-ul-Hind और Al-Qaeda in the Indian Subcontinent की कट्टर विचारधारा से प्रभावित थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2022 में श्रीनगर में हुई एक गुप्त बैठक के दौरान, अफगानिस्तान जाने की कोशिश असफल होने के बाद आरोपियों ने संगठन को फिर से सक्रिय करने की योजना बनाई और इसे “AGuH Interim” नाम दिया। इसके बाद कथित तौर पर “ऑपरेशन हेवनली हिंद” नाम की साजिश तैयार की गई, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को हटाना और देश में शरिया कानून लागू करना बताया गया है।
NIA के मुताबिक, इस दौरान आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती की, कट्टर विचारधारा का प्रचार किया और हथियारों के साथ-साथ विस्फोटक सामग्री भी इकट्ठा की। जांच में यह भी पाया गया कि बाजार में उपलब्ध रसायनों का उपयोग कर बड़े स्तर पर विस्फोटक तैयार किए गए और अलग-अलग तरह के IED का निर्माण व परीक्षण भी किया गया।
TATP विस्फोटक का इस्तेमाल
धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक TATP बताया गया है, जिसे कथित तौर पर गुप्त रूप से रसायन जुटाकर तैयार किया गया था। NIA ने अपनी जांच में इन सभी तथ्यों का विस्तार से उल्लेख किया है।