नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। इस त्रासदी में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आपदा से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करने और दिवंगतों को श्रद्धांजलि देने के लिए नेपाल सरकार ने सोमवार, 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है। इस मौके पर देशभर में सार्वजनिक अवकाश रहेगा।
नेपाल के गृह मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रीय शोक दिवस के दौरान देशभर के सरकारी कार्यालयों के साथ-साथ विदेशों में स्थित नेपाली राजनयिक मिशनों में भी राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। आपदा में जान गंवाने वाले लोगों की याद में नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं।
बिहार के रक्सौल से सटे नेपाल के बीरगंज में भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। घंटाघर चौक पर लोगों ने दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए दीप प्रज्वलित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। यह आपदा के 13 दिन बाद आयोजित किया गया, जिसे हिंदू परंपरा में शोक और स्मरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
राहत और बचाव अभियान जारी
बाढ़ से नेपाल में घरों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं समेत महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बल और बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में भी रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।
राहत कार्यों में भारतीय सेना, NDRF और BRO भी सहयोग कर रहे हैं और प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, आपदा के कारण करीब 32 हजार परिवार विस्थापित हुए हैं, जबकि लगभग 7,500 मकान पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। इसके अलावा लोगों की आजीविका और जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।