बिहार के जमुई जिले के झाझा प्रखंड में तैनात ग्रामीण कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता गोपाल Kumar के कई ठिकानों पर हुई छापेमारी में बड़ी मात्रा में संपत्ति और नकदी मिलने से जांच एजेंसियां भी हैरान रह गईं। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में आय से कहीं अधिक संपत्ति के संकेत मिले हैं।
गोपाल कुमार ने वर्ष 2008 में बिहार सरकार की सेवा जॉइन की थी और 2022 में उन्हें कार्यपालक अभियंता के पद पर पदोन्नति मिली। जांच में सामने आया है कि नौकरी के दौरान उन्होंने कथित तौर पर अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित की और भारी मात्रा में धन इकट्ठा किया। फिलहाल एजेंसियां उनकी चल-अचल संपत्तियों और निवेश की विस्तृत जांच कर रही हैं।
आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच में पाया गया है कि गोपाल कुमार ने अपनी ज्ञात आय से लगभग ₹2,00,61,000 अधिक संपत्ति अर्जित की है। यह उनकी घोषित आय से करीब 81.5% ज्यादा है। इस संबंध में पुख्ता साक्ष्य भी जांच एजेंसियों को मिले हैं।
16 मई को आर्थिक अपराध इकाई ने उनके चार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें बड़ी मात्रा में नकदी और संपत्ति बरामद हुई। कार्रवाई के दौरान ₹39,65,000 नकद, लगभग ₹47 लाख के आभूषण खरीद से जुड़े बिल, 424.08 ग्राम सोने के आभूषण (जिनकी अनुमानित कीमत करीब ₹60,47,000 है) और लगभग 1 किलो चांदी के गहने भी मिले।
इसके अलावा सगुना मोड़ स्थित JB Mall में दो व्यावसायिक दुकानें, जिनकी कीमत लगभग ₹70 लाख आंकी गई है, भी बरामद की गईं। साथ ही दानापुर बाजार समिति के पास एक आवासीय भूखंड (1.25 कट्ठा) मिला, जिस पर G+3 भवन का निर्माण चल रहा है। इस संपत्ति का पंजीकरण मूल्य लगभग ₹35 लाख बताया गया है, जबकि अतिरिक्त रूप से लगभग ₹93 लाख की अन्य संपत्तियों का भी पता चला है।
लक्ष्मी कॉटेज, दानापुर में एक 4BHK फ्लैट के लिए ₹80,00,000 नकद भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दौरान मिले हैं। इसके साथ ही तलाशी में एक Hyundai i10 कार और एक स्कूटी बरामद की गई है। छापेमारी के दौरान आवास से ग्रामीण कार्य विभाग से संबंधित कई सरकारी फाइलें और दस्तावेज भी मिले हैं, जिनकी जानकारी संबंधित विभाग को भेजी जाएगी। फिलहाल कार्रवाई जारी है।
जमुई स्थित किराए के आवास से ₹8,03,900 नकद और एक Hyundai Creta वाहन भी बरामद हुआ है, जो सुरेंद्र मोहन नाम के व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है और इसे लगभग ₹19 लाख में खरीदा गया था। इसके अलावा तीन बैंक खातों में कुल मिलाकर करीब ₹10 लाख की जमा राशि भी पाई गई है।
पूरे मामले में सामने आई संपत्ति को देखकर जांच एजेंसियां भी हैरान हैं, क्योंकि एक सरकारी नौकरी के आधार पर इतनी बड़ी संपत्ति का निर्माण गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।