कर्नाटक में SIR को लेकर सियासी घमासान, NDA ने राज्यपाल से की शिकायत

 

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी NDA के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। SIR की प्रक्रिया में राज्य सरकार और कांग्रेस से जुड़े लोगों के कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए NDA नेताओं ने मंगलवार को राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर शिकायत दर्ज कराई।

NDA नेताओं का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाना और अवैध घुसपैठ के चलते अयोग्य लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल होने की संभावनाओं को रोकना है। उनका आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान कर्नाटक सरकार के कुछ सदस्य और KPCC से जुड़े पार्टी कार्यकर्ता चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।

मतदाता सूची में आपत्ति दर्ज कराना वैधानिक अधिकार

ज्ञापन में NDA नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराना कानून के तहत नागरिकों को मिला अधिकार है। हालांकि, ऐसी आपत्तियों की जांच चुनाव अधिकारियों द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है। इसमें ERO और AERO स्तर पर जांच के साथ-साथ कानून में निर्धारित अपील की प्रक्रिया भी शामिल है।

विपक्ष का कहना है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में संभावित गलतियों और अनियमितताओं की पहचान के लिए एक साथ कई आवेदन भी दाखिल किए जा सकते हैं। इन आपत्तियों का निपटारा करने से पहले ERO और AERO द्वारा उनका क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जाता है।

BLA के अधिकारों का भी किया जिक्र

NDA ने अपने ज्ञापन में बूथ लेवल एजेंट यानी BLA की भूमिका का भी उल्लेख किया। नेताओं के मुताबिक, नियमों के तहत एक BLA कई फॉर्म-7 आवेदन दाखिल कर सकता है। इन आवेदनों की जांच और सत्यापन चुनाव अधिकारियों की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है।

कांग्रेस पर लगाया SIR में दखल का आरोप

BJP और JDS नेताओं ने कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि SIR एक संवैधानिक और चुनावी प्रक्रिया है, जिसे निष्पक्ष तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि राज्य में कांग्रेस सरकार से जुड़े लोग और KPCC के कार्यकर्ता इस प्रक्रिया में बड़े स्तर पर हस्तक्षेप कर रहे हैं।

NDA नेताओं ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने और SIR की प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं नियमों के मुताबिक सुनिश्चित करने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सीधे तौर पर चुनाव की निष्पक्षता से जुड़ी हुई है, इसलिए इस प्रक्रिया में किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव या अनुचित हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

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