कानपुर में 250 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए बर्रा पुलिस ने एक स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशन मैनेजर मुकेश झा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक कुल 10 आरोपी सलाखों के पीछे जा चुके हैं।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
पुलिस तफ्तीश में इस संगठित अपराध को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
बोगस फर्मों के नाम पर खाते: साइबर ठग आम लोगों को लालच देकर उनके पहचान पत्र (पैन और आधार कार्ड आदि) हासिल कर लेते थे। इनके जरिए ‘विमलेश जनरल स्टोर’ और ‘राज कॉन्ट्रैक्टर्स’ जैसी फर्जी फर्में बनाई गईं। बैंक मैनेजर की मिलीभगत से इन्हीं बोगस फर्मों के बैंक खाते खोले जाते थे।
मोटा कमीशन: मुकेश झा जैसे बैंककर्मी इन खातों की लेनदेन सीमा (ट्रांजेक्शन लिमिट) करोड़ों में बढ़ा देते थे, ताकि भारी रकम आसानी से ट्रांसफर हो सके। इस ‘सेवा’ के बदले बैंककर्मियों को 5 से 10 प्रतिशत तक का मोटा कमीशन मिलता था।
काले धन की हेराफेरी: इन खातों का मुख्य इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और GST चोरी से जुटाई गई काली कमाई को ठिकाने लगाने और खातों को फ्रीज होने से बचाने के लिए किया जाता था।
मास्टरमाइंड ‘सुल्तान मिर्जा’ दुबई फरार
इस पूरे सिंडिकेट का सरगना कानपुर के गोविंद नगर का रहने वाला अभय शुक्ला उर्फ ‘सुल्तान मिर्जा’ बताया जा रहा है। पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई और साथियों की गिरफ्तारी के बाद वह पहले नेपाल और फिर दुबई भाग चुका है। पुलिस अब इंटरपोल और अन्य एजेंसियों की मदद से उसे पकड़ने की तैयारी कर रही है।
रिटायर्ड अफसर से भी 1.83 करोड़ की ठगी
कानपुर में साइबर अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच एक अन्य ताजा मामले में साइबर जालसाजों ने एक रिटायर्ड अधिकारी को मनी लॉन्ड्रिंग केस (डिजिटल अरेस्ट) का खौफ दिखाकर उनके खाते से लगभग 1 करोड़ 83 लाख रुपये उड़ा लिए हैं। पुलिस फिलहाल इन सभी मामलों की कड़ियां जोड़ने और नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटी है।