श्रीलंका में शुरू हुई त्रिकोणीय वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में भारत ए और श्रीलंका ए की टीमें आमने-सामने हैं। मैच के दौरान भारतीय बल्लेबाज रुतुराज गायकवाड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक और वनडे शतक अपने नाम कर लिया। चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे गायकवाड ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाते हुए टीम की पारी को संभाला।
वहीं, इस सीरीज में भारतीय टीम की कमान संभाल रहे तिलक वर्मा ने भी कप्तानी के साथ-साथ बल्ले से दमदार योगदान दिया। दोनों बल्लेबाजों ने मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभाला और महत्वपूर्ण साझेदारी कर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
त्रिकोणीय सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय ए टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। श्रीलंका में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में भारत ए, श्रीलंका ए और अफगानिस्तान ए की टीमें हिस्सा ले रही हैं। श्रीलंका ए के खिलाफ मैच में कप्तान तिलक वर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, लेकिन भारतीय ओपनर्स टीम को मजबूत शुरुआत दिलाने में नाकाम रहे।
पारी की शुरुआत करने उतरे प्रभसिमरन सिंह और वैभव सूर्यवंशी जल्दी ही पवेलियन लौट गए। प्रभसिमरन 11 गेंदों पर महज 2 रन बना सके, जबकि वैभव ने 12 गेंदों में 14 रन की पारी खेली। इसके बाद तीसरे नंबर पर आए प्रियांश आर्या ने कुछ अच्छे शॉट लगाए, लेकिन वह भी 32 रन बनाकर आउट हो गए।
महज 16 रन के स्कोर पर दो विकेट गंवाने के बाद भारतीय टीम दबाव में आ गई थी। ऐसे में रुतुराज गायकवाड ने मोर्चा संभाला। तीसरा विकेट 69 रन पर गिरने के बाद कप्तान तिलक वर्मा भी क्रीज पर पहुंचे। दोनों बल्लेबाजों ने शानदार साझेदारी करते हुए पारी को संभाला और टीम को संकट से उबारकर बड़े स्कोर की दिशा में आगे बढ़ाया।
रुतुराज गायकवाड ने एक बार फिर अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाते हुए शानदार शतक जड़ दिया। भारतीय बल्लेबाज ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाते हुए 113 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। उनकी इस यादगार पारी में तीन चौके और तीन छक्के शामिल रहे, जिनकी बदौलत भारतीय टीम मजबूत स्थिति में पहुंच सकी।
हालांकि यह मुकाबला आधिकारिक वनडे अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं है, इसलिए यह शतक उनके वनडे रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होगा। फिर भी लिस्ट-ए क्रिकेट में इसकी गिनती होगी। इस उपलब्धि के साथ गायकवाड ने लिस्ट-ए क्रिकेट में अपने शतकों की संख्या 21 तक पहुंचा दी, जो उनकी निरंतरता और शानदार फॉर्म का प्रमाण है। शतक पूरा करने के कुछ ही समय बाद वह आउट हो गए और अपनी पारी को और बड़ा नहीं बना सके, लेकिन तब तक वह टीम के लिए मजबूत नींव तैयार कर चुके थे।