वॉशिंगटन: अमेरिका ने बुधवार को ईरान के खिलाफ एक और सैन्य कार्रवाई करते हुए इसे “रक्षात्मक कदम” बताया है। यह इस सप्ताह दूसरी बार है जब अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कदम तब उठाया गया जब ईरानी सेना की ओर से आक्रामक गतिविधियां देखी गईं।
अधिकारियों ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने कार्रवाई के दौरान ईरान के 4 ड्रोन को मार गिराया, जबकि एक अन्य ठिकाने को निशाना बनाकर उस स्थान को निष्क्रिय कर दिया गया जहां पांचवां ड्रोन लॉन्च किए जाने की तैयारी चल रही थी। बताया गया कि ये ड्रोन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ क्षेत्र के लिए खतरा पैदा कर सकते थे।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान फिलहाल “कमजोर स्थिति” में बातचीत कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी मध्यावधि चुनाव उनकी ईरान नीति को प्रभावित नहीं करेंगे और वह किसी भी जल्दबाजी में समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं।
कैबिनेट बैठक की शुरुआत में ट्रंप ने यह भी भरोसा जताया कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की संभावना जल्द बन सकती है। उन्होंने दावा किया कि पिछले सप्ताह के अंत में दोनों पक्षों के बीच बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, हालांकि अभी अंतिम समझौते तक पहुंचना बाकी है।
प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से सामान्य रूप से खोलना और ईरान की परमाणु क्षमताओं को सीमित करना बताया जा रहा है। इससे लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने का रास्ता निकल सकता है।
हालांकि इस संभावित समझौते पर अभी कई अहम सवाल बने हुए हैं और कुछ मुद्दों को आगे के लिए टाल दिया गया है। इसी वजह से ट्रंप को अपने ही समर्थकों और रिपब्लिकन नेताओं की आलोचना का सामना भी करना पड़ रहा है।
रिपब्लिकन पार्टी को लेकर जनता में असंतोष बढ़ता दिख रहा है। आलोचकों का मानना है कि ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व पर सैन्य दबाव का असर भले ही अस्थायी रूप से कमजोरी के रूप में दिखे, लेकिन आगे चलकर यह और अधिक आक्रामक रुख अपना सकते हैं।
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आ रहा है जब अमेरिका में कांग्रेस की सत्ता संतुलन तय करने वाले मध्यावधि चुनाव करीब हैं। इसी बीच रिपब्लिकन नेताओं के बीच चिंता बढ़ रही है कि बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतें जनता की नाराजगी को और गहरा कर सकती हैं।
हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी प्रभाव की बातों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें मध्यावधि चुनावों की चिंता नहीं है। उनके मुताबिक, “वे सोच रहे थे कि मामला चुनाव तक टाल दिया जाएगा, लेकिन मुझे चुनावों की कोई परवाह नहीं है।”