गंगा दशहरा पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब, हरकी पैड़ी पर स्नान के लिए जुटे हजारों श्रद्धालु

 

गंगा दशहरा के अवसर पर आज हरिद्वार की हरकी पैड़ी में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का नाश होता है। वहीं गंगोत्री धाम में भी भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सुबह से ही मंदिर परिसर वैदिक मंत्रों, शंखनाद और ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष से गूंज रहा है।

आज सोमवार सुबह 9:06 बजे से कन्या राशि में स्थित चंद्रमा और वृष राशि में विराजमान सूर्य के शुभ संयोग में स्नान का विशेष मुहूर्त बन रहा है। वैसे तो अधिक पुरुषोत्तम मास में सामान्यतः कोई प्रमुख पर्व नहीं मनाया जाता, लेकिन जब ज्येष्ठ मास में अधिक मास पड़ता है, तब ऋषि श्रृंग द्वारा हेमाद्रि संकल्प में दिए गए निर्देशानुसार दशहरा मनाने की परंपरा निभाई जाती है।

भारतीय संस्कृति में नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन, आस्था और सभ्यता की आधारशिला माना गया है। इनमें मां गंगा का स्थान सबसे ऊंचा है। गंगा दशहरा वह पावन अवसर है, जब मां गंगा के धरती पर अवतरण की स्मृति में श्रद्धा और भक्ति के साथ यह पर्व मनाया जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को आने वाला यह उत्सव केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है।

‘दशहरा’ का अर्थ है दस प्रकार के पापों का नाश। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गंगा में स्नान, दान, जप और पूजा करने से मनुष्य के दस पापों का क्षय होता है। इसी वजह से हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी और गंगासागर जैसे प्रमुख तीर्थस्थलों पर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। भक्त मां गंगा की आरती में शामिल होते हैं, दीपदान करते हैं और परिवार की सुख-शांति व समृद्धि की कामना करते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार अयोध्या नरेश भगवान श्रीराम के पूर्वज राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर मां गंगा को स्वर्ग से धरती पर अवतरित कराया था, ताकि कपिल मुनि के श्राप से भस्म हुए सगर पुत्रों की आत्माओं को मुक्ति मिल सके। गंगा अवतरण की यह दिव्य कथा सदियों से भारतीय जनमानस में श्रद्धा के साथ सुनाई जाती रही है। गंगा दशहरा के अवसर पर हरिद्वार से लेकर गंगासागर तक पूरे गंगा तट पर श्रद्धालु स्नान, ध्यान और पूजा-अर्चना कर मां गंगा के अवतरण दिवस को भक्ति भाव से मनाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *