हरिद्वार में होगी उत्तराखंड कैबिनेट की तीसरी बैठक, अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों पर रहेगा खास फोकस

 

हरिद्वार: उत्तराखंड में अर्धकुंभ मेला 2027 के आयोजन की तैयारियों के बीच हरिद्वार में होने वाली कैबिनेट बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। राज्य गठन के बाद यह तीसरा मौका है, जब प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक हरिद्वार में आयोजित की जा रही है। इस बैठक से अर्धकुंभ की तैयारियों को नई दिशा मिलने और मेले से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। बैठक में बुनियादी सुविधाओं के विकास से लेकर निर्माण कार्यों और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान रहने की संभावना है।

अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों को मिलेगी प्राथमिकता

हरिद्वार में आयोजित होने वाला अर्धकुंभ मेला धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को मजबूत करने की चुनौती रहेगी। ऐसे में कैबिनेट बैठक को मेले की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अर्धकुंभ के भव्य आयोजन के लिए सड़क, यातायात, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े इंतजामों को बेहतर बनाना जरूरी होगा। इसके अलावा विभिन्न विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करना भी सरकार और प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। बैठक में होने वाले फैसलों पर इसलिए भी नजर रहेगी, क्योंकि इनका असर अर्धकुंभ की तैयारियों की रफ्तार पर पड़ सकता है।

इससे पहले कब-कब हरिद्वार में हुई कैबिनेट बैठक?

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद हरिद्वार में इससे पहले दो बार कैबिनेट बैठक आयोजित की जा चुकी है। पहली बैठक वर्ष 2010 में कुंभ मेले के दौरान हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में हर की पौड़ी पर कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी। धार्मिक नगरी में आयोजित इस बैठक ने उस समय विशेष ध्यान आकर्षित किया था।

इसके बाद वर्ष 2016 में अर्धकुंभ से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में हरिद्वार के सीसीआर में कैबिनेट बैठक हुई थी। उस समय भी धार्मिक आयोजन की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर सरकार की गतिविधियां महत्वपूर्ण रही थीं।

विकास कार्यों और व्यवस्थाओं पर टिकी निगाहें

अब अर्धकुंभ मेला 2027 से पहले हरिद्वार में होने वाली तीसरी कैबिनेट बैठक को लेकर एक बार फिर उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस बार बैठक का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि मेले के आयोजन के लिए पर्याप्त समय रहते योजनाओं को अंतिम रूप देना और उन्हें जमीन पर उतारना आवश्यक है।

सरकार के संभावित फैसलों से हरिद्वार में विकास कार्यों को गति मिलने के साथ श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं तैयार करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, बैठक में किन प्रस्तावों को मंजूरी दी जाएगी और किन योजनाओं पर अंतिम निर्णय होगा, यह आधिकारिक फैसलों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल, अर्धकुंभ की तैयारियों और हरिद्वार के विकास से जुड़े मुद्दों के कारण इस बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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