दिल्ली में 10 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित CJP प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है। इस मामले में रविवार को विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई होनी है। हिरासत में लिए गए नेताओं में चार पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, पिनराई विजयन और माणिक सरकार शामिल हैं।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का दिया हवाला
मेनका गुरुस्वामी ने अपनी याचिका में कहा है कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। इस अधिकार को सीमित करने के लिए एहतियातन हिरासत का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों को सड़कों से और विपक्षी नेताओं को उनके आवासों से हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी है।
याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि विरोध जताने के अधिकार को बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर रहेगी।
जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच सके प्रदर्शनकारी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन को लेकर शनिवार को काफी हलचल रही। पुलिस की कार्रवाई के चलते प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। इसके कारण प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थल तक नहीं पहुंच सके और जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
प्रदर्शन को लेकर पुलिस ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी थी। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए की गई कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर सन्नाटा नजर आया। हालांकि, इस कार्रवाई के बावजूद राजनीतिक स्तर पर विरोध और कानूनी चुनौती का सिलसिला जारी रहा।
केजरीवाल और ममता बनर्जी भी हिरासत में
प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी निकले थे। हालांकि, उन्हें भी रास्ते में ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया और वह जंतर-मंतर नहीं पहुंच सके।
इसी तरह, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी पार्टी सांसदों के साथ विरोध जताने के लिए सड़क पर उतरीं। उन्हें भी हिरासत में लिया गया। इसके अलावा केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्षी नेताओं की हिरासत और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि याचिका में उठाए गए सवालों पर अदालत क्या रुख अपनाती है।