बॉलीवुड अभिनेता मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘गवर्नर’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। हाल ही में रिलीज हुए फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। इसी दौरान मनोज बाजपेयी ने अपनी बहुचर्चित और विवादों में रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर भी खुलकर बात की। अभिनेता ने बताया कि फिल्म के शीर्षक को लेकर उस समय इतना बड़ा विवाद खड़ा हो गया था कि उन्हें सोशल मीडिया पर भारी विरोध और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
मनोज बाजपेयी के अनुसार, विवाद बढ़ने के बाद उन्हें लगातार ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार बनाया गया। इतना ही नहीं, कई लोगों ने उन्हें धमकी भरे संदेश भी भेजे। अभिनेता ने खुलासा किया कि मामला केवल उनके तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके परिवार को भी इसमें घसीटा गया और उन्हें भी परेशान किया गया।
उन्होंने बताया कि जैसे ही विवाद बढ़ा, उन्होंने और फिल्म के निर्माताओं ने स्थिति को समझते हुए दो दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। हालांकि, इसके बावजूद सोशल मीडिया पर विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा था। मनोज के मुताबिक, माफी के बाद भी ट्रोल्स लगातार उन्हें निशाना बनाते रहे और पूरे मामले को लेकर माहौल लंबे समय तक गर्म बना रहा।
अभिनेता ने कहा कि यह उनके करियर के उन मुश्किल दौरों में से एक था, जब उन्हें न केवल सार्वजनिक आलोचना बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी दबाव और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हालात का सामना किया और अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखा।
घूसखोर पंडित’ विवाद को लेकर अभिनेता मनोज बाजपेयी ने पहली बार विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी है। पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि फिल्म के टाइटल को लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो जाएगा। अभिनेता के मुताबिक, जैसे ही उन्हें एहसास हुआ कि इस नाम से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, उन्होंने और फिल्म की टीम ने तुरंत स्थिति को संभालने का प्रयास किया।
मनोज बाजपेयी ने बताया कि विवाद सामने आने के महज दो दिनों के भीतर ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली थी। उनका मानना है कि रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए और यदि किसी कारणवश उनके काम से लोगों की भावनाएं प्रभावित होती हैं, तो उन्हें उसे सुधारने के लिए आगे आना चाहिए।
अभिनेता ने कहा कि क्रिएटिव इंडस्ट्री में काम करने वाले लोगों के पास हमेशा कई विकल्प होते हैं और किसी एक नाम या विचार पर अड़े रहने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि किसी विवाद को बढ़ाने के बजाय उसका समाधान निकालना अधिक महत्वपूर्ण है। मनोज के अनुसार, कलाकारों को समाज की संवेदनाओं का सम्मान करते हुए अपने काम में संतुलन बनाए रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर बदलाव करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।