NEET परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अब तक कई अहम खुलासे किए हैं। इसी बीच इस केस से जुड़ी एक नई जानकारी सामने आई है। शिवराज मोटेगांवकर की गिरफ्तारी के बाद उनका कोचिंग सेंटर RCC इंस्टीट्यूट भी CBI की जांच के दायरे में आ गया है।
जानकारी के अनुसार, RCC इंस्टीट्यूट से वर्ष 2025 में 21 छात्रों का NEET परीक्षा में चयन हुआ था। इनमें से 19 छात्रों ने देश के प्रमुख AIIMS संस्थानों में प्रवेश पाया, जबकि बाकी 2 छात्रों को मुंबई के KEM अस्पताल में दाखिला मिला।
CBI अब RCC इंस्टीट्यूट से जुड़े पुराने रिकॉर्ड्स की भी गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में है कि क्या 2025 से पहले भी शिवराज मोटेगांवकर तक NEET के प्रश्नपत्र पहले से पहुंचते थे। इसके साथ ही पिछले 4 से 5 वर्षों में इंस्टीट्यूट से चयनित छात्रों के रिजल्ट, उनके अंक और रैंक से जुड़ा पूरा डेटा भी खंगाला जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक, RCC इंस्टीट्यूट अपने सफल छात्रों के परिणाम, रैंक और NEET में मिली उपलब्धियों को प्रमुख मार्केटिंग टूल के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे में अब जांच एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि इन सफलताओं के पीछे केवल मेहनत थी या फिर किसी अनियमितता की भूमिका भी रही है।
RCC इंस्टीट्यूट के संचालक शिवराज मोटेगांवकर हैं, जिन्हें CBI ने गिरफ्तार किया है। महाराष्ट्र के कोचिंग क्षेत्र में वे “M Sir” के नाम से पहचाने जाते हैं। मूल रूप से लातूर के केमिस्ट्री शिक्षक रहे मोटेगांवकर ने RCC Classes (Renukai Chemistry Classes) को राज्य के प्रमुख NEET-JEE कोचिंग संस्थानों में शामिल कर दिया।