अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump 13 से 15 मई के बीच चीन की यात्रा पर जाएंगे, जहां उनका आमंत्रण चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने दिया है। यात्रा से पहले अमेरिका में स्थित चीनी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर चीन–अमेरिका संबंधों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
दूतावास ने तय की “चार रेड लाइन्स”
पोस्ट में दूतावास ने चीन और अमेरिका के बीच “चार रेड लाइन्स” यानी चार ऐसी सीमाएं तय की हैं, जिन्हें सुपरपावर शिखर सम्मेलन के दौरान पार नहीं किया जाना चाहिए। इनमें मुख्य रूप से ताइवान पर चीन का रुख और उसके विकास के अधिकार शामिल हैं। इसके अलावा अन्य संवेदनशील मुद्दों को भी इन सीमाओं में रखा गया है।
दूतावास ने कहा कि इन विषयों को किसी भी परिस्थिति में चुनौती नहीं दी जानी चाहिए। जारी ग्राफिक में ताइवान, लोकतंत्र और मानवाधिकार, राजनीतिक व्यवस्था तथा चीन के विकास अधिकार जैसे मुद्दों को बीजिंग के लिए गैर-समझौता योग्य बताया गया है।
चीन अमेरिका संबंधों पर बीजिंग का रुख
Xi Jinping ने 2024 में पहली बार “रेड लाइन्स” की अवधारणा पेश की थी। इसके बाद दूतावास ने कहा कि दोनों देशों को एक स्थिर, रणनीतिक और रचनात्मक संबंध की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
दूतावास के अनुसार, आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और पारस्परिक लाभ वाला सहयोग ही दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों की आधारशिला है।
ताइवान मुद्दा फिर केंद्र में
नवंबर 2024 में Xi Jinping और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति Joe Biden की मुलाकात के दौरान इन “चार रेड लाइन्स” का औपचारिक उल्लेख किया गया था।
चीन एक बार फिर ताइवान पर अपनी सख्त नीति दोहराते हुए उसे अपना हिस्सा बताता है। बीजिंग ने अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियार बेचने का विरोध किया है। हाल ही में Donald Trump द्वारा घोषित 11 अरब डॉलर के हथियार पैकेज के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। चीन ने वाशिंगटन से पहले हुए समझौतों का पालन करने की अपील की है।