तिब्बत में गुरुवार रात आए शक्तिशाली भूकंप ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रिक्टर स्केल पर 7.0 तीव्रता के इस भूकंप के कारण अब तक 16 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि 32 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में 11 की स्थिति गंभीर बनी हुई है। भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। मलबे में लोगों के फंसे होने की आशंका के बीच प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाना है।
भूकंप के तेज झटकों से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लोग अचानक धरती हिलने से घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए घरों तथा होटलों से बाहर निकलने लगे। कई जगह इमारतों और वाहनों में कंपन महसूस किया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, भूकंप से जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। राहत टीमों के मौके पर पहुंचने के साथ ही नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।
जमीन से 173 किलोमीटर नीचे था भूकंप का केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप भारतीय समयानुसार रात करीब 8 बजकर 3 मिनट पर आया। इसका केंद्र उत्तरी तिब्बत के नागकू शहर में था। भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 173 किलोमीटर की गहराई में दर्ज किया गया। यह स्थान तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर बताया गया है।
भूकंप की तीव्रता अधिक होने के कारण क्षेत्र के कई हिस्सों में इसके प्रभाव देखने को मिले। हालांकि, भूकंप से हुए नुकसान की पूरी तस्वीर सामने आने में अभी समय लग सकता है। अधिकारियों और बचाव दलों की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
नागकू शहर में सैकड़ों मकान ढहने की खबर
भूकंप का सबसे गंभीर असर नागकू शहर में देखने को मिला है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, यहां सैकड़ों मकान ढह गए हैं। इमारतों के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय लोगों के सामने रहने और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। मलबे के कारण बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ सकती हैं।
भूकंप के दौरान दुकानों के भीतर रखा सामान भी गिर गया। सीसीटीवी फुटेज में दुकानों के रैक पर रखी चीजें नीचे गिरती दिखाई दीं। अचानक आए झटकों से लोग इतने घबरा गए कि कई लोग बिना समय गंवाए खुले स्थानों की ओर भागने लगे।
राहत और बचाव अभियान जारी
भूकंप के बाद प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही क्षतिग्रस्त इमारतों और मलबे वाले क्षेत्रों की जांच की जा रही है। गंभीर रूप से घायल लोगों की स्थिति को देखते हुए चिकित्सा व्यवस्था भी अहम बनी हुई है।
फिलहाल, मृतकों और घायलों की संख्या शुरुआती रिपोर्टों पर आधारित है। बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ नुकसान के आंकड़ों में बदलाव हो सकता है। प्रशासन के सामने इस समय लोगों को सुरक्षित निकालने, घायलों का उपचार कराने और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने की चुनौती है।